Overblog All blogs
Follow this blog Administration + Create my blog
MENU
Advertising
"सीख जरूरी....मगर किसको??"

"सीख जरूरी....मगर किसको??"

"सीख की ज़रूरी......मगर किसको ??" आधी नींद भरी आँखों से सुबह अख़बार उठाओ तो आँख पूरी तरह खुलने से पहले ही या तो नम हो जाती हैं या तड़प और ग़ुस्से से लाल हो जाती हैं ? दिन भर की थकन से चुर दिमाग़ और शरीर, और ज़्यादा ही थक जाता है जब देश-दुनिया का हाल जानने...

Read more

Advertising
"वो लट्टू और कँचे"

"वो लट्टू और कँचे"

"वो लट्टू और कँचे" कहते हैं परिवर्तन, प्रकृति का नियम है ! ज़िंदगी की जद्दोजहद में जीवन कहाँ छूट जाता है इस बात का एहसास तक नहीं होता । ज़िंदगी अपनी रफ़्तार से चलती चली जाती है और प्रकृति अपने नियमानुसार परिवर्तन किये जाती है । कुछ परिवर्तन हमें रास आते...

Read more

"मंत्री या संतरी....??"

"मंत्री या संतरी....??"

पिछले तक़रीबन तीन-चार सालों से देश में एक अजीब सी लहर चल रही है । ऐसा लगता है मानों कुछ बहुत भर सा गया है और अब छलकने को बेताब है, एक शोर भरा सन्नाटा सा फैला दिखाई पड़ता है । लोगों में इतना रोष भर गया है कि अब वो छलकना शुरू हो चुका है । और ये रोष, ये...

Read more

भारत का "काला धन" यानी Black Money..?

भारत का "काला धन" यानी Black Money..?

"काला धन" यानी Black Money । क्या है ये ब्लैक मनी ? टैक्निकली वो पैसा जिस पर सरकार को टैक्स ना दिया गया हो । बीते वर्षों से काले धन पर हमेशा बहुत शोर होता रहा है । इधर पिछले २-३ वर्षों से इस काले धन के बादल इस क़दर छाये हुए हैं कि मानों अब बरसेंगे और...

Read more

Advertising
"कामयाबी की बुनियाद आत्मविश्वास...!!"

"कामयाबी की बुनियाद आत्मविश्वास...!!"

" कामयाबी की बुनियाद आत्मविश्वास...!!" जीवन में हर व्यक्ति कामयाब होना चाहता है । आकाश से भी ऊँची बुलन्दियों को पाना चाहता है । समाज, देश, दुनिया में किसी एक ख़ास मुक़ाम को हासिल करना चाहता है । लेकिन कामयाब होने के लिये सबसे ज़्यादा या ऐसे कहना चाहिये...

Read more

"वो भी चलते हैं अब तो तेवर बदलकर........!!"

"वो भी चलते हैं अब तो तेवर बदलकर........!!"

कभी-कभी मेरे आस-पास घट रही घटनाआें से और समाज के रूप को देख सुनकर मैं अपने अंदर ही अंदर बहुत परेशान हो जाता हूँ । ऐसी ही घटना अभी मेरे सामने आई, वैसे देखने - सुनने में कुछ भी नया सा नहीं है । लेकिन फिर भी कुछ चीज़ें नई ना होते हुए भी मुझे और शायद आपको...

Read more

Advertising
"बड़ी भावनाओं से सींचा था जिस पेड़ को कभी....!!"

"बड़ी भावनाओं से सींचा था जिस पेड़ को कभी....!!"

"बड़ी भावनाओं से सींचा था जिस पेड़ को कभी, उसी पर लटकी मिली बाप को खोई बेटी अभी" आज-कल चारों तरफ़ एक शब्द की गूँज है "विकास...विकास ... देश का विकास", राजनेता और पूँजीपति अपने-अपने तरीक़े इस शब्द का भरपेट इस्तेमाल कर रहे हैं और अपना उल्लू सीधा कर रहे...

Read more